Thursday, December 4, 2014

इंटरनेट शॉपिंग में सावधानी जरूरी

इंटरनेट शॉपिंग में सावधानी जरूरी
ई-कॉमर्स इन दिनों बूम पर है। नेट से खरीदारी ने इतना ज़ोर पकड़ लिया है कि लोग अब बाजार जाकर शॉपिंग करने से बचने लगे हैं। हालांकि ई-कॉमर्स के लिए अलग से किसी खास कानून के अभाव में भी सब काम चल रहा है, जबकि कंज्यूमर की शिकायतें बहुत ज्यादा हैं। प्रॉडक्ट में कमी, ऑर्डर से हटकर डिलिवरी, पैसा लेकर डिलिवरी न देना और रिफंड ना करने की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।
हमारे पास कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट तो है, लेकिन कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां तब आती हैं, जब लोग वेबसाइट की पूरी जानकारी लिए बिना इंटरनेट के माध्यम से डील कर लेते हैं, पैसे भी क्रेडिट कार्ड से दे देते हैं और फिर वेबसाइट चलाने वाले अचानक गायब हो जाते हैं। ऐसे में कंज्यूमर कोर्ट चाहकर भी ठगे गए लोगों की मदद नहीं कर पाती, क्योंकि कोर्ट का नोटिस देने के लिए दोषी पक्ष का पूरा पता चाहिए।
कोनसीम इन्फो प्राइवेट लिमिटेड बनाम गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मामले में दिल्ली की अदालत में गूगल ने यह तर्क दिया कि गूगल एक सर्च इंजन है और इस पर कोई भी वेबसाइट क्या विज्ञापन देती है, इसकी जिम्मेदारी गूगल की नहीं होती। अदालत ने इस तर्क को माना, लेकिन यह भी कहा कि यदि किसी फ्रॉड की सूचना गूगल को मिलती है तो 36 घंटों के अंदर उसे भी ऐक्शन लेना होगा।
ई-कॉमर्स वेबसाइट से शॉपिंग के मामले में दूसरी बड़ी कठिनाई यह आती है कि मामला किस कोर्ट में चलाया जाए और ऐक्शन कहां हुआ माना जाए? फिलहाल इंटरनेट के माध्यम से होने वाली शॉपिंग के लिए कंज्यूमर कोर्ट कंपनी के एड्रेस और कंज्यूमर का निवास, दोनों ही जगहों पर मामले दर्ज कर रही है। इसलिए अब यह समस्या नहीं रही। इसी तरह नेट पर भ्रामक विज्ञापनों को हैंडल करने के मामले में भी कंज्यूमर कोर्ट सक्षम है, लेकिन इसके लिए फ्रॉड कंपनियों का सही पता होना जरूरी है। खास बात यह कि किसी चैनल पर दिए जाने वाले भ्रामक प्रोग्राम के लिए चैनल को भी पार्टी बनाया जा सकता है।
वैसे, कुछ सावधानियां कंज्यूमर को भी ध्यान में रखनी चाहिए:
- डील करने से पहले कंपनी के कारोबार का पता, उसका रजिस्टर्ड ऑफिस और ब्रांच आदि की जानकारी लें। अनजानी वेबसाइट्स पर भरोसा न करें।
- सामान बेचने की प्रक्रिया, ट्रैकिंग संबधी सूचना, प्राइवेसी पॉलिसी आदि की जानकारी विस्तार से लिए बिना अपना अकाउंट नंबर वेबसाइट पर न दें। और अगर आपने कहीं गलती से वह दे दिया है तो अपने अकाउंट को चेक करते रहें।
- यदि ऑर्डर प्लेस होने के बाद प्रॉडक्ट उपलब्ध नहीं होने की सूचना मिलती है तो आप साइट को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि ये प्लैटफॉर्म आपको डीलरों की मदद से सामान उपलब्ध कराते हैं और यह डिमांड व सप्लाई पर निर्भर करता है।
- ऑर्डर कन्फर्म होने के बाद आपको इसकी सूचना दी जाती है और ऑर्डर नंबर दिया जाता है। इसे संभालकर रखें।
- वैसे, अगर आप इस शॉपिंग के लिए कैश ऑन डिलिवरी ऑप्शन को चुनें तो रिफंड की लंबी प्रक्रिया से बच सकते हैं।
- अगर आप बार-बार कैश ऑन डिलिवरी ऑर्डर करके डिलिवरी नहीं लेते तो कंपनी के रेकॉर्ड में आप डिफॉल्टर हो सकते है। ऐसे में अगर वह कंपनी आपका ऑर्डर न ले या ऑर्डर कन्फर्म न करे तो आप उसे कुछ कह नहीं सकते, क्योंकि अपना प्रॉडक्ट न बेचने का अधिकार उसके पास है।

24 कैरेट गोल्ड की नहीं बनती ज्वैलरी

एक आवश्यक जानकारी
24 कैरेट गोल्ड
की नहीं बनती ज्वैलरी
हॉलमार्किंग योजना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम
के तहत संचालन, नियम और विनियम का काम
करती है। सबसे पहली बात यह
कि असली सोना 24 कैरेट
का ही होता है, लेकिन इसके अभूषण
नहीं बनते, क्योंकि वो बेहद मुलायम होता है।
आम तौर पर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल
किया जाता है, जिसमें 91.66
फीसदी सोना होता है। हॉलमार्क पर
पांच अंक होते हैं। सभी कैरेट का हॉलमार्क
अलग होता। मसलन 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875
और 18 पर 750 लिखा होता है। इससे शुद्धता में शक
नहीं रहता।
ऐसे समझिए कैसे तय कर सकते हैं अपने गोल्ड
की कीमत
1. कैरेट गोल्ड का मतलब होता हे 1/24 पर्सेंट गोल्ड,
यदि आपके आभूषण 22 कैरेट के हैं तो 22 को 24 से भाग
देकर उसे 100 से गुणा करें।
(22/24)x100= 91.66 यानी आपके आभूषण
में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 91.66
फीसदी।
मसलन 24 कैरेट सोने का रेट टीवी पर
27000 है और बाजार में इसे खरीदने जाते हैं
तो 22 कैरेट सोने का दाम (27000/24)x22=24750 रुपए
होगा। जबकि ज्वैलर आपको 22 कैरेट सोना 27000 में
ही देगा। यानी आप 22 कैरेट सोना 24
कैरेट सोने के दाम पर खरीद रहे हैं।
2. ऐसे ही 18 कैरेट गोल्ड
की कीमत भी तय
होगी। (27000/24)x18=20250 जबकि ये ही सोना ऑफर के साथ देकर ज्वैलर आपको छलते हैं।

Tuesday, July 3, 2012

सफ़ेद दाग(ल्युकोडर्मा) का ईलाज ऐसे करें

सफ़ेद दाग(ल्युकोडर्मा) का ईलाज ऐसे करें.:how to treat leucoderma?

सफ़ेद दाग निवारक नुस्खे
easy remedies for vitiligo:


ल्युकोडर्मा चमडी का भयावह रोग है,जो रोगी की शक्ल सूरत प्रभावित कर शारीरिक के बजाय मानसिक कष्ट ज्यादा देता है। इस रोग में चमडे में रंजक पदार्थ जिसे पिग्मेन्ट मेलानिन कहते हैं,की कमी हो जाती है।चमडी को प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाले इस पिग्मेन्ट की कमी से सफ़ेद दाग पैदा होता है।इसे ही श्वेत कुष्ठ कहते हैं। चर्म विकृति पुरुषों की बजाय स्त्रियों में ज्यादा देखने में आती है।
ल्युकोडर्मा के दाग हाथ,गर्दन,पीठ और कलाई पर विशेष तौर पर पाये जाते हैं। अभी तक इस रोग की मुख्य वजह का पता नहीं चल पाया है।लेकिन चिकित्सा के विद्वानों ने इस रोग के कारणों का अनुमान लगाया है।पेट के रोग,लिवर का ठीक से काम नहीं करना,दिमागी चिंता ,छोटी और बडी आंर्त में कीडे होना,टायफ़ाईड बुखार, शरीर में पसीना होने के सिस्टम में खराबी होने आदि कारणों से यह रोग पैदा हो सकता है।
शरीर का कोई भाग जल जाने अथवा आनुवांशिक करणों से यह रोग पीढी दर पीढी चलता रहता है।इस रोग को नियंत्रित करने और चमडी के स्वाभाविक रंग को पुन: लौटाने हेतु कुछ घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित हुए हैं जिनका विवेचन निम्न पंक्तियों में किया जा रहा है--

१) दस लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें, जब ४ लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें और इसमें आधा किलो सरसों का तेल मिला दें,यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। ४-५ माह तक ईलाज चलाने पर अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।

२.) बाबची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है।५० ग्राम बीज पानी में ३ दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें।बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखालें। पीस कर पावडर बनालें।यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में घिसकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।

3) बाबची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर चार दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत ही कारगर उपचार है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज कुछ रोज के लिये रोक देना उचित रहेगा।

4) एक और कारगर ईलाज बताता हुं--
लाल मिट्टी लावें। यह मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। अब यह लाल मिट्टी और अदरख का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन ल्युकोडेर्मा के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है। और अदरख का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।



५) श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना फ़ायदेमंद है।

6) मूली के बीज भी सफ़ेद दाग की बीमारी में हितकर हैं। करीब ३० ग्राम बीज सिरका में घोटकर पेस्ट बनावें और दाग पर लगाते रहने से लाभ होता है।
उक्त सरल उपाय अपनाकर ल्युकोडर्मा रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। वैध्य दामोदर निवासी बोलिया,मध्य प्रदेश ने अपने हर्बल फ़ार्मूले से सैंकडों रोगियों को सफ़ेद दाग से मुक्ति दिलाई है। संपर्क हेतु उनका नं.है 09826795656.

1857 की मनु - झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

1857 की मनु - झांसी की रानी लक्ष्मीबाई

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मणिकर्णिका दामोदर ताम्बे (रानी लक्ष्मी गंगाधर राव)
(१९ नवम्बर १८३५ - १७ जून १८५८)

मात्र 23 वर्ष की आयु में प्राणोत्सर्ग करने वाली झांसी की वीर रानी लक्ष्मी बाई के जन्मदिन पर अंतर्जाल से समय समय पर एकत्र किये गये कुछ चित्रों और पत्रों के साथ ही सेनानी कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ओजस्वी कविता के कुछ अंश:

हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
रानी - 1850 में फोटोग्राफ्ड

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपुर,पटना ने भारी धूम मचाई थी,

जबलपुर, कोल्हापुर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
युद्धकाल में रानी लिखित पत्र

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।

लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
युद्धकाल में रानी लिखित पत्र

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वंद असमानों में।

ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
रानी का पत्र डल्हौज़ी के नाम

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।

अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी राजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
मनु के विवाह का निमंत्रण पत्र

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।

पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
अमर चित्र कथा का मुखपृष्ठ्

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।

घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

झांसी की रानी की आधिकारिक मुहर
रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,

सुभद्रा कुमारी चौहान - सेनानी कवयित्री की पुण्यतिथि

सुभद्रा कुमारी चौहान - सेनानी कवयित्री की पुण्यतिथि

हिन्दी साहित्य जगत हो या भारत के स्वाधीनता संग्राम की गाथा, हमारे देश का इतिहास ऐसे नर-नारियों से भरा पडा है जो कलम के धनी तो थे ही, राष्ट्र-सेवा में प्राण अर्पण करने में भी किसी से पीछे रहने वाले नहीं थे। इन्हीं कवि-सेनानियों की श्रंखला के एक महामना पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा को सिलसिलेवार प्रकाशित करने का महान कार्य हमारे अपने डॉक्टर अमर कुमार अपने ब्लॉग काकोरी के शहीद पर बखूबी कर रहे हैं। यदि आप की रूचि एक अद्वितीय स्वाधीनता संग्राम सेनानी द्वारा लिखे लोमहर्षक और प्रामाणिक विवरण को विस्तार से जानने में है तो कृपया एक बार वहाँ जाकर ज़रूर पड़ें और अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करे।

इस परमोच्च श्रेणी के साहित्यकारों की बात चलती है तो एक और नाम बरबस ही याद आ जाता है। सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। १९०४ में इलाहाबाद जिले के निहालपुर ग्राम में जन्मीं सुभद्रा खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह से विवाहोपरांत जबलपुर में रहीं. उन्होंने १९२१ के असहयोग आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया. नागपुर में गिरफ्तारी देकर वे असहयोग आन्दोलन में गिरफ्तार पहली महिला सत्याग्रही बनीं. वे दो बार १९२३ और १९४२ में गिरफ्तार होकर जेल भी गयीं। उनकी अनेकों रचनाएं आज भी उसी प्रेम और उत्साह से पढी जाती हैं जैसे आजादी के पूर्व के दिनों में. "सेनानी का स्वागत", "वीरों का कैसा हो वसंत" और "झांसी की रानी" उनकी ओजस्वी वाणी के जीवंत उदाहरण हैं. वे जितनी वीर थीं उतनी ही दयालु भी थीं। १५ फरवरी १९४८ में एक कार दुर्घटना के बहाने से ईश्वर ने इस महान कवयित्री और वीर स्वतन्त्रता सेनानी को हमसे छीन लिया। आइये उनकी पुण्यतिथि पर याद करें उन सभी वीरों को जिन्होंने इस राष्ट्र की सेवा में हँसते हँसते अपना तन-मन-धन न्योछावर कर दिया. प्रस्तुत है सुभद्रा कुमारी चौहान की मर्मस्पर्शी रचना, "जलियाँवाला बाग में वसंत" जिसे मैंने बचपन में खूब पढा है:

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते,
काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते।

कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से,
वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।

परिमल-हीन पराग दाग सा बना पड़ा है,
हा! यह प्यारा बाग खून से सना पड़ा है।

ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु धीरे से आना,
यह है शोक-स्थान यहाँ मत शोर मचाना।

वायु चले, पर मंद चाल से उसे चलाना,
दुःख की आहें संग उड़ा कर मत ले जाना।

कोकिल गावें, किन्तु राग रोने का गावें,
भ्रमर करें गुंजार कष्ट की कथा सुनावें।

लाना संग में पुष्प, न हों वे अधिक सजीले,
तो सुगंध भी मंद, ओस से कुछ कुछ गीले।

किन्तु न तुम उपहार भाव आ कर दिखलाना,
स्मृति में पूजा हेतु यहाँ थोड़े बिखराना।

कोमल बालक मरे यहाँ गोली खा कर,
कलियाँ उनके लिये गिराना थोड़ी ला कर।

आशाओं से भरे हृदय भी छिन्न हुए हैं,
अपने प्रिय परिवार देश से भिन्न हुए हैं।

कुछ कलियाँ अधखिली यहाँ इसलिए चढ़ाना,
कर के उनकी याद अश्रु के ओस बहाना।

तड़प तड़प कर वृद्ध मरे हैं गोली खा कर,
शुष्क पुष्प कुछ वहाँ गिरा देना तुम जा कर।

यह सब करना, किन्तु यहाँ मत शोर मचाना,
यह है शोक-स्थान बहुत धीरे से आना।

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अमर शहीद मंगल पांडे के जन्म दिन पर नमन!

यह सूरज अस्त नहीं होगा!


(19 जुलाई 1827 --- 8 अप्रैल 1857)

जिस ईस्ट इंडिया कम्पनी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता था, वह हमेशा के लिये डूब गया. सिर्फ एक सिपाही ने गोली चलाने का साहस किया और यह असम्भव घटना इतिहास में दर्ज़ हो गयी. उसी सिपाही की गोली का एक साइड इफ़ेक्ट यह भी हुआ कि विश्व के सबसे धनी मुगल साम्राज्य का भी खात्मा हो गया. एक सिपाही का साहस ऐसे दो बडे राजवंशों का काल सिद्ध हुआ जिनका डंका कभी विश्व के अधिकांश भाग में बजता था.

इतिहास भी कैसी-कैसी अजब करवटें लेता है – क्या इत्तफाक़ है कि 1857 की क्रांति को भडकाने वाली एनफील्ड राइफल के लिये पशु-वसा में लिपटी उस गोली को बनाने वाली एनफील्ड कम्पनी इंग्लैंड में अपनी दुकान कबकी समेट चुकी है परंतु भारत में अभी भी गोली (बुलेट मोटरसाइकिल) बना रही है.



1857 के स्वाधीनता संग्राम की पहली गोली चलाने वाले अमर शहीद मंगल पांडे के जन्म दिन पर नमन! मृत्युदंड के समय वे 29 वर्ष के थे.

मंगल पाण्डेय की भूमिका में आमिर खान

[सभी चित्र इंटरनैट से साभार]

योकोसो जापान! स्वागत है श्रीमान [पाठ 1]

योकोसो जापान! स्वागत है श्रीमान [पाठ 1]

घर बैठे जापानी सीखिये



कुन्निचिवा!

हिन्दी से जापानी सीखने के मेरे इस व्यक्तिगत प्रयास में आपका स्वागत है। वैसे भी बहुत दिनों से किसी नई भाषा पर हाथ साफ नहीं किया था। सोचा कि जापानी ही सीख लेते हैं। जितना सीखते जायेंगे उसके नोट्स बनाकर यहाँ रखते जायेंगे। सम्भव हुआ तो उच्चारण सहायता के लिये ऑडिओ भी रखेंगे।



आज के पाठ में हम ऐसे कुछ शब्द जानेंगे जिन्हें आप स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकते हैं।

नमस्ते = कुन्निचिवा
शुभ प्रभात = ओहायो
स्वागत = योकोसो (सर्वमान्य शब्द);
स्वागत = इरासाइमासे (दुकानदार द्वारा ग्राहक के स्वागत के लिये प्रयुक्त)
हाँ = हाइ
न = आइ
जापानी (भाषा) = निहोंगो
अरिगात्तो = धन्यवाद
प्राचीन भारत = तेन्जिकु (स्वर्ग का केन्द्र)
भारत = इन्दो
शाकाहारी भोजन = शोजिन र्योरी

और अब आज के लिये भारत में जापानी भाषा का सबसे प्रचलित शब्द, सायोनारा (विदा) अगले पाठ तक!