"नागरिको के प्रमुख हथियार सुचना के अधिकार का नौकरशाहों द्वारा किया जा रहा ह्श्न"""
राजस्थान सूचना आयोग में नगर निगम व जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (JDA) की और से एक अधिवक्ता महोदय वर्षों से आ रहे हैं। सूचना का अधिकार जनता का अधिकार है जिसमें मांगी गई सूचना विभागों को उपलब्ध करवानी होती है। लेकिन जेडीए व नगर निगम से आवेदक को सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाते है और जबकि नगर निगम में प्रथम अपील पर प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा सुनवायी का मौका ही नहीं दिया जाता है। अधिनियमानुसार प्रथम अपील दायर होने के 45 दिवस में सुनवाई करना अनिवार्य है। जेडीए द्वारा प्रथम अपीलेट अधिकारी के निर्णय देने उपरांत भी प्रार्थी को कोई सुचना नहीं दी जाती है।
मजबूरन प्राथी को सुचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत करनी होती है, जंहा 1-2 साल बाद सुनवाई का नंबर आता है। जेडीए और नगर निगम की और से लोक सूचना अधिकारी या अन्य अधिकारी और कर्मचारियों को उपस्थित होना चाहिए किंतु नगर निगम और जेडीए की तरफ से एक ही अधिवक्ता महोदय पैरवी करने जाते हैं। नगर निगम और जेडीए द्वारा मोटी राशि खर्च कर अधिवक्ता नियुक्त करना समझ से बाहर है।
नागरिकों को सूचनाएं उपलब्ध करवाने की जगह अधिवक्ता नियुक्त कर सुचना देने में अड़ंगा लगाना भ्रष्ट कर्मियों की साजिश है। अधिवक्ता महोदय की नियुक्ति में भी पारदर्शिता का बिल्कुल अभाव है अधिवक्ता महोदय की नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई......???
उनका वर्षों तक एक्सटेंशन किस आधार पर किया गया......???
उन्हें अब तक नगर निगम और जेडीए द्वारा कितना भुगतान किया जा चुका है.....???
निगम एवं जेडीए द्वारा इस सम्बन्ध में कोई सुचना नहीं दी जा रही है....???
कोई भी अधिकारी यह बात बताने को तैयार नहीं है।
उनका वर्षों तक एक्सटेंशन किस आधार पर किया गया......???
उन्हें अब तक नगर निगम और जेडीए द्वारा कितना भुगतान किया जा चुका है.....???
निगम एवं जेडीए द्वारा इस सम्बन्ध में कोई सुचना नहीं दी जा रही है....???
कोई भी अधिकारी यह बात बताने को तैयार नहीं है।
जब सीधा सा आम आदमी सूचना आयोग में उपस्थित होता है तो वहां यह वकील मोहदय कानूनी मकड़जाल में उलझा कर गुमराह करके डरा देते हैं चूँकि प्राथी को इन सूचनाओ से न्याय मिलने का भरोसा होता है तो जेडीए व् नगर निगम के अधिवक्ता का उनके स्वम की और से पैरवी करने का प्रस्ताव प्राथी स्वीकार कर लेता है। बेचारा पीड़ित इनकी बातों में आ जाता है वकील साहब अपने किसी जानकार वकील को उस व्यक्ति की ओर से खड़ा कर देते हैं यानी दोनों पक्षों के वकील वही होते हैं सूचना आयोग में जाने पर ऐसे कई मामले दिखाई देते हैं लगातार आने से इन वकील साहब की आयोग के स्टाफ से भी अच्छी जान पहचान हो गई है। जिसकी पुष्टि सुचना आयोग के फैसले देखने से हो जाती है। सूचना के अधिकार के नाम पर इतना बड़ा गोरख धंधा राजधानी जयपुर में चल रहा है सरकार को मामले की तह में जाकर सच्चाई का पता लगाना चाहिए और दोषी लोगों पर कारवाई करनी चाहिए। सरकार का काम आम जनता को सूचना उपलब्ध करवा है ना की सूचना से वंचित करना। सरकार को इन वकील महोदय की नियुक्ति प्रक्रिया का पता लगा कर इन्हें अब तक किए गए भुगतान का पता लगाना चाहिए नगर निगम और जेडीए के अधिकारी गण आम आदमी को सूचना से वंचित रखने के लिए कितने सरकारी धन की बर्बादी का चुके हैं। सरकार को सभी सरकारी विभागों को निर्देश देने चाहिए की सम्बंधित विभाग के राज्य लोकसूचना अधिकारी ही सुचना आयोग में सुनवाई में अपना पक्ष रख सकेंगे। जिस से आम नागरिक RTI एक्ट के अनुसार सूचनाएं मिल सके। दोनों पक्षों का निर्णय सुचना आयुक्त महोदय अधिनियमानुसार करने में सक्षम है सरकार ने Retd. वरिष्ठ आईएएस व् आईपीएस अधिकारियो को मोटे वेतन व् अन्य सुविधाओ पर नियुक्त कर रखा है।
जय हिंद
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